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टीकाकरण से भारत में 46 मौतें, यूरोपीय देशों ने टीकाकरण पर लगाया रोक

Reported By : Raj Laxmi

Published On : March 13, 2021

कोरोना वैक्सिन विश्व भर में व्याप्त कोविड वायरस से लड़ने के लिए जो उम्मीद बनकर आई थी अब वही उम्मीद कुछ असामान्य मौतों की वजह भी बनते जा रही है। खबरों की माने तो डेनमार्क, नार्वे, और आइसलैंड के स्वास्थ्य प्राधिकरणों ने एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल को निलंबित कर दिया है। इसके पीछे की वजह कोविडशील वैक्सिन के टीकाकरण के बाद कुछ लोगों के शरीर में खून का थक्का लगना बताया जा रहा है। टीकाकरण करवाने आ रहे लोगों के शरीर मे खून का थक्का बन जा रहा है। जिससे उनकी मौत हो जा रही है।

डेनमार्क में दो हफ़्ते तक रोका गया कोविडशील्ड का टीकाकरण

डेनमार्क में कोविशील्ड टीका लगने के बाद 60 वर्षीय महिला के खून में थक्का जमने से उसकी मौत हो गई। उसे उसी बैच का टीका लगा था, जिसका प्रयोग ऑस्ट्रिया में हो रहा था। मामला सामने आने के बाद डेनमार्क ने दो हफ्ते के लिए टीके का इस्तेमाल को रोक दिया है। नार्वे और आइसलैंड ने भी इसी तरह का कदम उठाया है। पर इन सबके उलट यूरोपीय यूनियन के दवा नियामक यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी (ईएमए) का कहना है कि वैक्सीन के फायदे इससे होने वाले ख़तरों की तुलना में बहुत ज्यादा हैं और इसका प्रयोग जारी रखा जा सकता है।

मौतों के मामलें दरकिनार कर गिने जा सकते है वैक्सिन के फ़ायदे

यानी कि कुल मिलाकर कहा जाए तो नुकसान को दरकिनार करते हुए वैक्सिन के फ़ायदे गिने जा सकते है। वो भी वैक्सिन से होने वाली मौतों को नजरअंदाज करते हुए। यदि वैक्सिन के प्रतिकूल प्रभाव की बात कर ले तो अन्य यूरोपीय देशों की तरह भारत भी वैक्सिन के दुष्प्रभाव से बचा हुआ नहीं है। भारत में भी वैक्सिन के दुष्प्रभाव का नमूना कुछ उदाहरण के माध्यम से लगाया जा सकता है।

पहले से कोई बीमारी नहीं, टीकाकार ने ली जान!

24 वर्षीय डॉ. नीरज सिंह की 14 फरवरी को मौत हो गई थी। उन्हें तीन फरवरी को कोविशील्ड का टीका लगाया गया था। डॉक्टर के परिजनों का कहना है कि उन्हें इससे पूर्व में किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं थी। वहीं दूसरी ओर कर्नाटक के शिवमोगा जिले में जेपी हॉस्पिटल के मालिक व 59 वर्षीय ऑर्थोपेडिक सर्जन की 20 जनवरी, 2021 को मौत हो गई थी। ठीक दो दिन पहले उन्हें कोविशील्ड टीका लगाया गया था। मृत्यु की वजह को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया है कि संबंधित चिकित्सक की मृत्यु माईकार्डियल इनफ्रैक्शन (एमआई) की वजह से हुई है। चिकित्सकीय टर्म एमआई को आम प्रचलित रूप में हार्ट अटैक कहा जाता है।

टीका लगने के दूसरे दिन ही स्वास्थ्य कर्मी की हुई मौत

इससे पहले आंध्र प्रदेश के निर्मल जिले में, कर्नाटक के ही बेल्लारी जिले और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में ऐसी मौतें हुई हैं। तेलंगाना के निर्मल जिले में 20 जनवरी, 2021 को 42 वर्षीय व्यक्ति की मौत हुई थी जबकि 19 जनवरी की सुबह उसे कोविशील्ड का वैक्सीन दिया गया था। वो प्राइमरी हेल्थ सेंटर में एंबुलेंस ड्राइवर था। निर्मल जिले के स्वास्थ्य अधिकारी चेरुपल्ली धनराज के मुताबिक एंबुलेंस ड्राइवर को 19 जनवरी, 2020 को 11:30 बजे सुबह टीका लगाया गया था। उसे किसी तरह की तकलीफ नहीं हुई थी और न ही उसने अपनी ड्यूटी छोड़ी थी। वह शाम को 5 बजे घर गया लेकिन आधी रात के बाद 2.30 बजे उसे सीने में दर्द महसूस हुआ और वह जिला अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।

देश में कोविड टीके से 46 मौतें

ऐसे ही अनगिनत मामलों और भी है जिसमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से वैक्सिन लगने के तुरंत बाद ही व्यक्ति की मौत दर्ज की गई है। 26 फरवरी के सरकार के बयान के मुताबिक COVID-19 टीकाकरण के बाद 46 लोगों की मौत हुई है। जबकि 51 लोग अस्पताल में भर्ती किये गये थे। ये स्वास्थ्य सेवा और अन्य फ्रंटलाइन कार्यकर्ता थे। इसके बाद, सरकार ने COVID-19 टीकाकरण के बाद लोगों की गंभीर AEFI (मौतों या अस्पताल में भर्ती) की रिपोर्ट नहीं दिया है। ये बस कुछ आंकड़े है जिन्हें सरकार ने अपनी नज़रों में रखा। वरना आप सभी यह अच्छी तरह से जानते है कि सरकारी आंकड़े भारत में किस तरह से पूरी बाजी मारते है।


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