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भारत में बढ़ा अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न: अमरीकी संस्था USCIRF की रिपोर्ट

Reported By : Mohammad Sartaj Alam

Published On : April 29, 2020

इस वक़्त जब पूरा विश्व COVID19 की वजह से एकजुट हो कर कोरोना के खिलाफ चल रही जंग जीतने की जद्दोजहद कर रहा है. भारत में कोरोना से बचने के लिए जहां 40 दिनों के कम्पलीट लॉक डाउन के दौरान देश पोलुशन फ्री हो गया, नदियाँ साफ़ हो गईं, हवाएं स्वच्छ हो गईं, वहीं भारत में सामाजिक वातावरण उसी रफ़्तार से प्रदूषित हुआ. दरअसल भारत में कुछ ऐसी घटनाएं घट रही हैं जिनसे यह साबित हो रहा है कि COVID19 से भी कहीं खतरनाक कम्युनल वायरस है. जो कोरोना से भी कहीं तेज़ी से अपनी जड़ें जमा चूका है. वैसे तो पूरे भारत में ऐसे मामलों की भरमार है, लेकिन यहां भारत के खनिज बहुल स्टेट झारखण्ड की तीन घटनाओं का ज़िक्र करूँगा. जमशेदपुर के MGM अस्पताल में गर्भवती महिला रिज़वाना खातून की प्रिग्नेंसी सिर्फ इस लिए बिगड़ी कि उसके नाम मुसलमान था. रामगढ़ ज़िले के राजू अंसारी की लिंचिंग की कोशिश सिर्फ इस लिए हुई कि उसने अपना नाम मुस्लिम बताया. जमशेदपुर में ही नसीम अंसारी को सब्ज़ी बेचने से तब रोका गया जब उसने अपना मुस्लिम नाम नसीम खान बताया. तीनो में एक बात कॉमन है, वह ये कि तीनो को कहा गया कि तुम मुस्लिम लोग भारत में कोरोना फैला रहे हो. सबसे मज़ेदार बात यह है कि जमशेदपुर और रामगढ में कोरोना के एक भी मरीज़ नहीं हैं.

दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता पर नज़र रखने वाली अमरीकी संस्था ने यूएस कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ़्रीडम (USCIRF) ने साल 2020 के लिए अपनी सालाना रिपोर्ट जारी कर दी है.

मंगलवार को जारी की गई इस रिपोर्ट में भारत को उन 14 देशों के साथ रखने का सुझाव दिया है जहां ‘कुछ ख़ास चिंताएं’ हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत उन देशों में शामिल है जहां धार्मिक अल्पसंख्यकों पर उत्पीड़न लगातार बढ़ रहा है.

गर्भवती रिज़वाना का मुस्लिम नाम सुनकर अस्पतालकर्मी ने गालियां दीं, पीटा और कोरोना फैलाने का आरोप लगाया

16 अप्रैल को दिन के 1 बजे गर्भवती महिला रिज़वाना खातून अचानक रक्त स्राव के कारण अपने भाई के साथ अस्पताल के लिए निकलीं. लॉकडाउन की वजह से कई अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद वह जमशेदपुर के सरकारी MGM अस्पताल पहुंचीं.

अस्पताल के लेबर रूम में महिला के शरीर से रक्त स्राव जारी था, जो फर्श तक पहुंच गया. इसे देख कर वहां मौजूद अस्पताल कर्मचारी ने नाम पूछा, नाम सुनते ही उस कर्मचारी ने भद्दी भद्दी गालियां देते हुए उसके धर्म पर कोरोनो वायरस फैलाने का आरोप लगाया. अस्पताल कर्मचारी ने कहा कि फर्श पर पड़ा खून साफ़ करो. इस बात पर पीड़िता रिज़वाना ने नर्स से कहा कि मेरे खड़े होने लायक हालत नहीं है मैं साफ़ नहीं कर पाउंगी. आप मेरी माता को बुला दें, मेरी तबियत बहुत ख़राब है. इस बात पर कर्मचारी द्वारा मरीजस से मारपीट की गई. मरीज़ के भाई मोहम्मद मेराज ने मौके पर पहुंच कर इस बात का विरोध किया.

“ज़मीन पर रक्तस्राव से फैले ब्लड को देख लेबर रूम की एक कर्मचारी ने मेरी बहन से उसे साफ़ करने के लिए कहा. बहन ने कहा कि मेरी हालत ठीक नहीं है आप घर वालों को बुला दीजिए, इस बात पर कर्मचारी ने विरोध करते हुये मेरे धर्म को अपशब्द कहे. यह सब देख कर पहले तो मैंने विरोध किया लेकिन बहन को बेहोश देख कर उसे दुसरे अस्पताल ले जाना बेहतर समझा. जहां उसका इलाज हुआ.” मोहम्मद मिराज, पीड़ित मरीज़ के भाई

आँखों में आंसू लिए मोहम्मद शमीम जो रिज़वाना के पति हैं, वह कहते हैं कि अस्पताल की लापरवाही के कारण मेरी पत्नी की हालत बिगड़ी, लेबर रूम में आधा घंटे तक कोई इलाज नहीं हुआ, रक्तस्राव जारी था. जिससे मेरी पत्नी की स्थिति गंभीर तो हुई ही साथ ही गर्भ की स्थित भी बिगड़ गई. पत्नी की स्थिति तो अब पहले से बेहतर है लेकिन एक ज़िंदगी जो गर्भ में थी उसने दुनिया में आँख खोलने से पहले ही अस्पताल की लापरवाही के कारण उसे मूँद लीं.

“मरीज़ के साथ दो हम दो लेडीज़ के होने के बावजूद भी हमें वार्ड से बहार निकल दिया गया. वार्ड के अंदर बेटी का इलाज तो नहीं हुआ लेकिन जो भी हुआ है वह गलत है, किसी के साथ कभी ऐसा न हो हम यही चाहते हैं.” रज़िया खातून, रिज़वाना की माँ

“अभी हम जांच नहीं किये हैं. सारी बातें जांच के बाद ही पता चलेंगी. रही बात उनके आरोप की तो आरोप लगाने के लिए कोई भी आरोप लगा सकते हैं, कुछ भी आरोप लगा सकते हैं. अब क्या सच्चाई है ये अहम् बात है.” डॉक्टर एन के चौधरी डेपुटी सुपरिटेंडेंट

मुस्लिम नवजवान से नाम पूछा फिर उग्र भीड़ ने पीटा, पुलिस बिन कपड़ों के ले जाती दिखी

इंडिया का स्टेट झारखण्ड एक, दो नहीं बल्कि दर्जनों मोब लिंचिंग केस का गवाह है. तबरेज़ अंसारी मॉब लिंचिंग केस की भयावह यादें अभी धुंधली भी नहीं पडी थीं कि उसी झारखंड में एक बार फिर उग्र भीड़ ने एक मुस्लिम शक्स को शिकार बनाया. डिस्ट्रिक्ट हजारीबाग के गिद्दी थाना क्षेत्र में राजू अंसारी नाम के एक शख्स को चोरी का आरोप लगा कर बुरी तरह पीटा गया. ताज्जुब की बात यह है कि जब पुलिस आई तो वोह भीड़ के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उपद्रवियों के साथ सहानुभूति पूर्वक बातचीत करती दिखाई दी. हद तो तब हो गई कि पुलिस बिना कपड़ों के ही पीड़ित को हाथ पकड़ कर ले जाती दिखी.

घटना 18 अप्रैल की रात की है. राजू अंसारी हजारीबाग के गिद्दी में अपने ससुराल गया था. वो रहने वाला जिला रामगढ़, पतरातु थाना क्षेत्र का का है. राजू अंसारी के पिता अली जान अंसारी के मुताबिक राजू जब ससुराल में अपनी गर्भवती पत्नी से मिलकर लौट रहा था तो उसकी बाइक में पेट्रोल खत्म हो गया. रात के करीब 11 बज रहे थे. वो पेट्रोल तलाशने के लिए रुका ही था कि कुछ लोगों ने उसका नाम पूछा. जैसे ही उसने अपना नाम बताया, उसकी पिटाई शुरू कर दी. पिटाई के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं जिसमें भीड़ राजू को गालियां दे रही है, देश द्रोही बता रही है और उसपर कोरोना फैलाने का आरोप लगा रही है. वरिष्ठ पत्रकार रावी प्रकाश ने इस बात की जानकारी झारखण्ड के मुख्यमंत्री को दी. मुख्यमंत्री ने तीव्र कदम उठाया तब जाकर राजू की जान बची. लेकिन अभी भी वह बुरी तरह घायल है.

“उन्होंने नाम सुनते ही चोर-चोर कह कर पिटाई शुरू कर दी. पुलिस के सामने भी बिना कपड़ों के पिटाई हुई. मेरा बेटा कहता रह गया कि मैं बेगुनाह हूं लेकिन नहीं माने. पुलिस भी बिना कपड़ों के राजू को ले गई.” अली जान अंसारी, राजू के पिता

चोर होने के आरोप पर क्षेत्रीय थाना पतरातु, जहां राजू का घर है, वहां के थाना प्रभारी आदिल हुसैन से इस बात को पूछ गया तो उनहोंने बताया कि राजू का कोई आपराधिक बैकग्राउंड नहीं है. राजू ईंट भट्ठा पर मज़दूरी करता है.

“राजू को रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती है. सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस ने राजू से फोन पर बात की थी. उन्होंने पूछा कि कहां चोट लगी है. मेरे भाई ने कहा- सर कहां-कहां बताऊं, कहां चोट लगी है.” शमशेर अंसारी, राजू के भाई

हजारीबाग के सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस “मयूर पटेल कन्हैया लाल” ने बातचीत में बताया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है. हालांकि एसपी ने इसे मॉब लिंचिंग का केस मानने से इनकार किया क्योंकि किसी की मौत नहीं हुई.

नसीम खान तुम सब्ज़ी नहीं बेच सकते, तुम लोगों के कारण ही कोरोना फैल रहा है

22 अप्रैल: मोहम्मद नसीम नामक एक सब्जी विक्रेता अपनी दुकान केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के घोड़ाबंधा आवास के पास सब्जी बाज़ार में लगता था। मोजम्मद नसीम के अनुसार आशीष पॉल समेत कुछ युवक आकर उनसे उसका नाम पूछने लगे। जैसे ही सब्ज़ी विक्रेता ने अपना नाम नसीम खान बताया वैसे ही आशीष पॉल समेत अन्य युवकों ने उसे धमकाना शुरू कर दिया। दुकान हटाते हुए उक्त युवकों ने उसपर कोरोना फैलाने का इल्ज़ाम लगाया. भविष्य में दुबारा वहां दुकान लगाने पर जान से मारने की धमकी दी।

घटना के तुरंत बाद ही पीड़ित युवक शिकायत करने क्षेत्र के गोविंदपुर थाना पहुंचे। जहाँ FIR हुई.

पीड़ित सब्जी विक्रेता मोहम्मद नसीम ने बताया कि “लॉकडाउन से पूर्व टेंपो चला कर वह गुज़ारे के लिए कुछ पैसे कमा लेते थे. लॉकडाउन के दौरान टेम्पो चलने बंद हो गए, इनकम बंद हो गई तो मैंने मजबूरन अपना घर चलाने के लिए केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के आवास के पास सब्ज़ी बाज़ार में दस दिनों से दुकान लगानी शुरू की।

दरअसल यह तीनो ही केस एक ही समुदाय के खिलाफ हो रही हिंसा को उजागर करते हैं. आज पूरे भारत में ऐसे अनगिनत मामले हैं जिनमें इस्लामोफोबिया का प्रचार कर के गरीब मुस्लिमों पर कोरोना फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है और साफ़ सुथरे सामाजिक वातावरण को प्रदूषित किया जा रहा है.

अमरीकी सरकार द्वारा इंटरनेशनल रिलीजियस फ़्रीडम एक्ट की असफलता के बाद 1998 में USCIRF का गठन हुआ था. लेकिन भारत शुरू से ही USCIRF के विचारों को मान्यता नहीं देता. पिछले एक दशक से ज़्यादा वक़्त से भारत संस्था के सदस्यों को वीज़ा भी नहीं देता है. इससे पहले भी भारत ने कहा था कि अमरीकी संस्था बिना पर्याप्त सबूतों के सिर्फ़ अपने पूर्वाग्रहों के आधार पर राय बनाती है.

इसके अलावा, भारत शुरू से ही कहता आया है कि नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी उसके आंतरिक मुद्दे हैं और किसी भी बाहरी देश या संस्था को इसमें दख़ल देने का अधिकार नहीं है.

साल 2019 में भी USCIRF ने भी भारत सरकार की नीतियों पर अल्पसंख्यकों, ख़ासकर मुसलमानों की धार्मिक आज़ादी का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था.


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