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आज लोकतंत्र का दृश्य सस्ती और घटिया राजनीति की पहचान

Reported By : Ankit

Published On : April 25, 2021

लोकतंत्र का यह दृश्य जो लोकतंत्र में सस्ती और घटिया राजनीति की पहचान देता है। अगर हमारे देश के नेता सस्ती और घटिया राजनीति छोड़ कर कभी देश हित के लिए राजनीति किए रहते तो कल दिल्ली में जो हुआ, वह दृश्य नहीं देखने को मिलता। आज शमशान हो कब्रिस्तान हो या अस्पताल हो हर जगह लाइन लगी हुई है। लोग अपनों को यूं ही खो रहे हैं कोई ऑक्सीजन के बिना मर जा रहा है तो कोई बेड के बिना मर जा रहा है। सरकार आंखें मूंद कर प्रोटोकॉल प्रोटोकॉल खेलने में व्यस्त हैं।

आज के समय में अगर किसी को अस्पताल में वेंटिलेटर मिलता है तो समझ लीजिए, उसे आठवां अजूबा मिल गया हो । आज ऐसी स्थिति भारत में हो गई है कि भारत का हर एक नागरिक अब आत्मनिर्भर बन चुका है। वैसे भी हमारे देश के प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर का बात भी करते थे , लेकिन कभी भी यह नहीं सोचे कि आखिर भारत आत्मनिर्भर बनेगा कैसे जब सिस्टम गटर में पहुंच गया हो, जहां सिस्टम में ही भ्रष्टाचार का ऐसा दीमक लग गई हो जहां ऑक्सीजन जैसे विषय पर भी राजनीति होने लगे, वैसे भी हमारे देश में सस्ती और घटिया राजनीति हमारे देश की पहचान है।

ऐसा लगता है की अब लोकतंत्र बस कहने का एक सबसे बड़ा शब्द मात्र रह चुका है, इस समय में वही बड़ा है जिसके पास सत्ता का ताकत है, अगर आपके पास सत्ता का ताकत नहीं है तो आपको एंबुलेंस आज नहीं मिल सकता है, मिल गया तो प्राईवेट वाले मुंह मांगी कीमत मांगते हैं। आपके पास सत्ता का ताकत नहीं है तो आज आपको बेड नहीं मिल सकता है। आपके पास सत्ता का ताकत नहीं है तो आज आपको अच्छा अस्पताल में भर्ती नहीं हो सकते आज दिल्ली हो मुंबई हो उत्तर प्रदेश हो या देश का कोई भी राज्य हर जगह लोग ऑक्सीजन के लिए त्राहिमाम किए हुए हैं ।

माननीय मंत्री, सांसद, विधायक जी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसलिए नहीं फर्क पड़ता है क्योंकि हमारे देश में यह परंपरा रही है कि कोई भी विकट परिस्थिति आए तो पहले सस्ती और घटिया राजनीति हो आज जिस तरह से लोग ऑक्सीजन ऑक्सीजन चिल्ला रहे हैं नेता चुनाव चुनाव चिल्ला रहे हैं ।

समझ नहीं आ रहा आखिर हो क्या रहा है जिस तरह से 1 साल का समय केंद्र और राज्य दोनों को मिला था उस समय अगर केंद्र और राज्य दोनों मिलकर अपने स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किए रहते अपने अस्पतालों को मजबूत किए रहते तो आज यह दृश्य देखने को नहीं मिलता।

लेकिन क्या करेंगे हमारे देश में हर एक सरकारी काम भगवान भरोसे होता है और वैसे भी हमारे देश के नेताओं को और मंत्रियों को और विधायकों को और सांसदों को ऐसा लग रहा होगा कि अब कोरोना तो चला गया लेकिन कोरोना महामारी का दूसरा प्रकोप भारत का मरा हुआ स्वास्थ्य व्यवस्था का पोल पट्टी खोल के रख दिया है। कि आज लोग अपनों को अस्पताल में बेड के बिना खो रहे हैं ऑक्सीजन के बिना खो रहे हैं और सरकार और सिस्टम बैठ कर तमाशा देख रहा है।

राज्य और केंद्र आपस में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए लड़ाई कर रहे हैं। केंद्र सरकार से यही प्रार्थना है आपात काल में सबको साथ आना चाहिए केंद्र हो या राज्य हो और भारतीय सेना को साथ लेकर इस विकट परिस्थिति से भारतवासी को निकालने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि जनता जब सांसद और विधायक चुनती है और जब मंत्री चुनती बहुत उम्मीद से चुनती है और उसके उम्मीद को अगर रोड पर यूं ही बिखरते हुए छोड़ दिया जाए तो जनता जाए तो जाए कहा जनता वैसे भी जानता साहब सब देख रही है । आप लोगों वैसे भी जनता को भगवान बोलते हैं चुनावी सभा में लेकिन आज भगवान दर-दर भटक रहा है और भक्त महल में बैठकर तेरी मेरी की राजनीति कर रहे हैं.

सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुईं है कि मीडिया अब सारा आरोप प्रत्यारोप सिस्टम पर करें। सरकार को कठघरे में खड़ा न करें। इससे प्रधानमंत्री के इमेज को धूमिल होगी। ऐसा एक सर्कुलर सरकार द्वारा अन आधिकारिक तौर पर जारी किया गया है।


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