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बक्से में शोभा पा रहे है मेडल, कोई खिलाड़ी मनरेगा तो कोई हड़िया बेचने का कर रहा है काम

Reported By : Raj Laxmi

Published On : July 2, 2020

पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे होगे खराब। इस कहावत को झूठलाता हुआ इंडिया आज खेलकूद के क्षेत्र में काफी आगे निकल चुका है। एक वक्त था जब लोग खिलाड़ी की प्रतिभा पर हमेशा प्रश्नचिन्ह खड़ा करते थे परंतु अब खेलकूद के क्षेत्र में आगे आते भारत के युवा ना सिर्फ अपने देश का नाम रौशन कर रहे हैं अपितु अपना भविष्य उज्जवल कर रहे हैं।

परंतु एक खिलाड़ी जब मेहनत के बाद भी सफलता की सीढ़ी नहीं चल पाता तो वह न सिर्फ अपने भाग्य को कोसता है बल्कि वह कोसता है अपनी सरकार को भी जिसके राज्य का नाम रौशन कर खिलाड़ी खुद ही अंधेरे में सोने को मजबूर है। इसी कहावत एक छोटा सा भुक्तभोगी बन रहे हैं झारखण्ड राज्य के आलोक लाकड़ा और विमला मुंडा, जो विदेश में अपने देश और राज्य का परचम लहराने के बाद भी आज दाने-दाने को मोहताज है।

लॉन बॉल में 2018 में ऑस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ गेम में खेल चुके आलोक लकड़ा की सरकारी नौकरी की आस में काटते काटते अब अपनी आर्थिक स्थिति से तंग आकर अपने मां-पिता के संग मनरेगा श्रमिक बन गये। 34वें नेशनल गेम में कराटे में झारखंड के लिये सिल्वर मेडल लाने वाली विमला मुंडा हड़िया बेचकर घर परिवार का हाथ बंटा रही है।

आलोक लकड़ा बताते हैं, लॉन बॉल में कॉमनवेल्थ गेम्स तक में शामिल होने के अलावा 12वीं एशियन चैंपियनशिप (दिल्ली, 2017) में गोल्ड मेडल जीता चूका हू। केरल में हुए 35वें नेशनल गेम्स (वर्ष 2015) में सिल्वर मेडल जीता था। छठे और सातवीं नेशनल लॉन बॉल चैंपियनशिप (2017-19) में गोल्ड मेडल पर कब्जा किया था। लेकिन ये इनाम अब किसी काम नहीं आ रहे हैं।

वहीं विमला मुंडा कहती है, अब मेडलों को निहारने की बजाये उन्हें बक्से में बंद कर दिया है। रांची में हुए 34वें नेशनल गेम्स में कराटे में सिल्वर मेडल जीता था। इसके अलावा 2010 से 2019 के बीच नेशनल कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड, सिल्वर और रजत पदक जीत चुकी हु। लेकिन अब हडिया बेचने का काम करती हूं। मां दूसरों के खेतों में काम करती है। पिता शारीरिक रूप से अस्वस्थ है, ऐसे में मॉडलों की चमक फीकी पड़ जाती है और इंसान कोई भी काम करने को तैयार हो जाता है।

क्या हैं सीधी न्युक्ति की प्रक्रिया

खेल विभाग ने अक्टूबर-नवंबर, 2019 में नेशनल इंटरनेशनल मेडल विजेताओं के लिये खेल कोटे से सीधी नियुक्ति के लिये विज्ञापन जारी किया था। कई प्लेयर्स ने आवेदन किये थे। विभाग ने इस साल फरवरी में फाइनली 34 खिलाडियों को शॉर्टलिस्टेड किया था। जानकारी के अनुसार, खेल निदेशालय ने कुछ दिनों पहले इससे संबंधित फाइल को विभागीय सचिव के पास बढ़ा दिया है। खेल निदेशक अनिल कुमार सिंह के अनुसार, विभाग नयी खेल नीति को अंतिम रुप देने में लगा है। इससे राज्य की खेल प्रतिभाओं को समय पर नौकरी और वाजिब सम्मान मिल सकेगा।


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