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डिजिटल के‌ नाम पर सब कुछ परोसने का नतीजा है”ब्वॉयज लॉकर रूम”

Reported By : Editorial

Published On : May 7, 2020

इंस्टाग्राम पर ब्वॉयज लॉकर रूम नाम से एकाउंट बनाकर छात्रों द्वारा अश्लील चैटिंग और छात्राओं की अश्लील फोटो शेयर की जा रही थीं। इस मामले में पुलिस ने एक छात्र को उसके मोबाइल के साथ गिरफ्तार कर लिया। जबकि 20 अन्य छात्रों की पहचान की जा चुकी है। यह सभी छात्र एक नामी पब्लिक स्कूल में दसवीं के छात्र हैं। 

आरोपी ग्रूप‌ एडमिन ने इस वर्ष बारहवीं की परीक्षा दी है

दिल्ली पुलिस के साइबर प्रकोष्ठ ने चर्चित इंस्टाग्राम ग्रुप के एडमिन को गिरफ्तार कर लिया है। “बॉयज लॉकर रूम” नामक इस ग्रुप के 18 वर्षीय एडमिन ने इस साल बारहवीं बोर्ड की परीक्षा दी है। पुलिस प्रशासन के अनुसार गिरफ्तार किया गया नाबालिग एडमिन दिल्ली-एनसीआर के एक स्कूल का छात्र है। 

पुलिस के अनुसार नाबालिगों सहित, इस ग्रुप के दस सदस्यों की भी पहचान की गई है। साथ ही आरोपी से पूछताछ की गई और अपराध के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों को ज़ब्त कर लिया गया। ग्रुप के सदस्यों के पास से उपकरण लेकर जब्त कर लिए गए हैं। इन उपकरणों को फॉरेन्सिक विश्लेषण के लिए भेजा गया है। उन्होंने बताया कि ग्रुप के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बहरहाल इनसब से होगा क्या? ले देकर उंगलियों‌ पर गिने जा सकने वाले लोगों पर‌ ही नज़र रखी‌जा सकती है। मामला पूरी युवा होती पीढ़ी का है जिसके लिए डिजिटल‌ प्लेटफॉर्म जितना कुसूरवार है उससे कहीं बड़ी गुनहगार सूचना क्रांति है जो सब कुछ बिना सेंसर के परोसे जा रही है कैंची चला सकने वाली सरकार आखें मूंदे है।

इंस्टाग्राम ने हटाई आपत्तिजनक सामग्री

पुलिस प्रशासन के अनुसार, वयस्क आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। ग्रुप के नाबालिग सदस्यों से किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के अनुसार जानकारी हासिल की जा रही है। पूर्व में इंस्टाग्राम ने कहा था कि वह इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से ले रहा है और इस तरह के आचरण की अनुमति बिल्कुल नहीं देता। इंस्टाग्राम के अनुसार, बच्चियों की तस्वीरों वाली आपत्तिजनक सामग्री, जानकारी मिलने के तत्काल बाद प्लेटफॉर्म से हटा दी गईं।

IT एक्ट की धाराओं के तहत हो रही है कार्रवाई

महिला वकील नीला गोखले और इलमा परीदी की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट को एक पत्र लिखा गया। इस पत्र में दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को कहा गया है कि इस मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी बेहद ज़रूरी है। जिससे महिलाओं के खिलाफ इस तरह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हो रहे अपराधों पर लगाम लग सके।

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक

इस पूरे मुद्दे पर मनोचिकित्सक का कहना है कि अश्लील फिल्म देखना किसी तरह की बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक तरह की युवाओं में लत है। इसे आसानी से छुड़ाया जा सकता है। दरअसल, बच्चों में जब हार्मोस में बदलाव शुरू होता है, तो विपरीत लिंग के प्रति उनकी रुचि बढ़ने लगती है। इसे लेकर वह अपने साथियों से अश्लील बातें, तस्वीरें और वीडियो शेयर करने लगते हैं।

वह कदम जिससे समाज के युवाओं को भटकने से बचाया जा सके

कक्षा 6 से ही बच्चों की होनी चाहिए काउंसेलिंग

स्कूल‌ सरकारी हों या प्राइवेट हर संस्थान में काउंसलर की नियुक्ति होनी चाहिए। जैसे जैसे कक्षा आगे बढ़े वैसे वैसे काउंसेलिंग का स्तर बढ़ता जाए। यह कदम सरकार से लेकर स्कूल प्रबंधकों‌ द्वारा शीघ्र उठाया जाना‌ चाहिए। 

बच्चों को एकांत से बचाएं

अश्लील फिल्में देखने और उसकी तलाश में छात्र लड़कियों के नाम से फेक प्रोफाइल बनाकर ऐसे ही लोगों का ग्रुप बना लेते हैं। जो‌ एकांत में फोन पर अक्सर पोर्न देखते हैं। ऐसे में बच्चों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों के स्मार्टफोन पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और समय-समय पर इसे चेक करना चाहिए। 

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती अश्लीलता पर लगे रोक

पहले‌ दूरदर्शन था, लोग फिल्में देखने सिनेमाघरों में जाते थे। धीरे-धीरे चैनल की बाढ़ आ गई। इस बीच लोग अपने बच्चों‌ पर फिर भी नियंत्रण रख पाते थे। लेकिन जैसे ही कम्प्यूटर ने घरों‌में दस्तक दी आभिभावक के नियंत्रण की डोर कम्ज़ोर पड़ने लगी। अब जैसे ही‌ स्मार्ट फोन की‌ क्रांति आई अभिभावकों का वह नियंत्रण धराशायी हो चुका था। अब आप किसी भी साइट पर विज़िट कर रहे हैं एक से एक अश्लीलता परोसती प्रचार सामग्री मौजूद होती है।

मामला यहीं खत्म‌ नहीं होता है, वेब सीरीज़ का ऐसा‌ काला युग है कि “मस्तराम” से लेकर “वर्जिन भास्कर” जैसे वेब शोज़ के ऐडवरटाईज़ अलग अलग साइट पर युवाओं को डसने के लिए फन काढ़े बैठे हैं। ऐसे में गुगल‌ प्ले पर उपलब्ध विभिन्न ऐप के प्रकोप ‌से आप तब तक बच्चों को‌ नहीं बचा सकते जबतक‌ कि सरकार इस अश्लीलता की बढ़ती‌ फफूदी के प्रति गम्भीर नहीं ‌होती है।


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The Khabar Khand. Opinion of Democracy

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